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कर्नाटक में एम्स की स्थापना के लिए केंद्र ने दी हरी झंडी

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दिल्ली/बेंगलुरु, 18 मई (आईएएनएस)। कर्नाटक के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र को प्रोत्साहन देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कर्नाटक में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की स्थापना को हरी झंडी दे दी है।

बुधवार को नई दिल्ली में कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री के. सुधाकर को केंद्रीय स्वास्थ्य मनसुख मंडाविया के साथ हुई बैठक के दौरान यह आश्वासन दिया गया।

सुधाकर ने इससे पहले केंद्र सरकार से कर्नाटक में एम्स शुरू करने का अनुरोध किया था, ताकि राज्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा के बुनियादी ढांचे को बढ़ाया जा सके।

मंत्री सुधाकर ने कहा, मैं अपने प्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया जी को कर्नाटक के लिए एम्स का आश्वासन देने के लिए धन्यवाद देता हूं। इससे राज्य को बहुत लाभ होगा और राज्य के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा में और वृद्धि होगी।

डॉ. के सुधाकर ने यह भी घोषणा की कि एक नए राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निमहंस) पॉली ट्रॉमा सेंटर और पीजी संस्थान के लिए डीपीआर स्थायी वित्त समिति (एसएफसी) को जमा कर दी गई है। एक बार मंजूरी मिलने के बाद, नया संस्थान बेंगलुरु में हेनूर मेन रोड के पास क्यालासनहल्ली में बनाया जाएगा।

प्रारंभ में, कर्नाटक सरकार ने 2021 में एक मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए एसएफसी को एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। हालांकि, एसएफसी ने सरकार से पीजी प्रशिक्षण में निमहंस विशेषज्ञता पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा था। नया 538 बिस्तर वाला एम्स 489 करोड़ रुपये की लागत से तीन साल में बनकर तैयार हो जाएगा।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को लिखे अपने पत्र में, सुधाकर ने गुणवत्ता और व्यावसायिकता सुनिश्चित करने के लिए नसिर्ंग और संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान के लिए एक अलग राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय खोलने पर भी विचार किया था।

उन्होंने अस्पतालों के प्रशासन के लिए पीपीपी मॉडल, विशेष पाठ्यक्रम और अस्पताल प्रबंधन में सेवारत डॉक्टरों के प्रशिक्षण का भी प्रस्ताव रखा।

अन्य सुझावों में डीम्ड विश्वविद्यालयों में अधिवास छात्रों (डोमिसाइल स्टूडेंट्स) के लिए प्राथमिकता के अनुसार और सभी जिलों में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए भारत सरकार की सहायता प्रदान करना शामिल है, भले ही वहां कोई निजी मेडिकल कॉलेज हो या नहीं।

–आईएएनएस

एकेके/एएनएम


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