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हमारा देश शाही व्यवस्थाओं और शाही सिंहासनों से नहीं बना है: पीएम

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नई दिल्ली, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा, हमारा देश शाही व्यवस्था और शाही सिंहासनों से नहीं बना है।

सिविल सेवा दिवस के अवसर पर लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार प्रदान करने के बाद बोलते हुए उन्होंने कहा, हजारों वर्षों से हमारी जो परंपरा रही है, वह आम आदमी की ताकत को आगे बढ़ाने की परंपरा रही है।

मोदी ने सुझाव दिया कि सभी प्रशिक्षण अकादमियां साप्ताहिक आधार पर पुरस्कार विजेताओं की प्रक्रिया और अनुभवों को वर्चुअल साझा कर सकती हैं।

दूसरा, पुरस्कार विजेता परियोजनाओं में से कुछ जिलों में से एक योजना को लागू करने के लिए चुना जा सकता है और उनके अनुभव पर अगले साल के सिविल सेवा दिवस में चर्चा की जा सकती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे में, हमें तीन लक्ष्यों के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए।

पहला लक्ष्य यह है कि देश में आम लोगों के जीवन में बदलाव आए, उनका जीवन आसान हो और वे भी इस सहजता को महसूस करने में सक्षम हों। आम लोगों को सरकार के साथ अपने व्यवहार में संघर्ष नहीं करना चाहिए, लाभ और सेवाएं बिना किसी परेशानी के उपलब्ध होनी चाहिए।

दूसरा, भारत के बढ़ते कद और बदलते प्रोफाइल को देखते हुए यह जरूरी है कि हम जो कुछ भी करें, वह वैश्विक संदर्भ में किया जाए।

प्रधानमंत्री ने कहा, अगर हम वैश्विक स्तर पर गतिविधियों का पालन नहीं करते हैं, तो हमारी प्राथमिकताओं और फोकस क्षेत्र का पता लगाना बहुत मुश्किल होगा। हमें इस परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अपनी योजनाओं और शासन मॉडल को विकसित करने की जरूरत है।

तीसरा, उन्होंने कहा, हम जहां भी व्यवस्था में हैं, हमारी प्रमुख जिम्मेदारी देश की एकता और अखंडता है, कोई समझौता नहीं हो सकता है। यहां तक कि स्थानीय निर्णयों को भी इस कसौटी पर मापा जाना चाहिए। हमारे हर निर्णय का मूल्यांकन देश की एकता और अखंडता को शक्ति प्रदान करने की इसकी क्षमता पर किया जाना चाहिए। राष्ट्र पहले को हमेशा हमारे निर्णयों को सूचित करना चाहिए।

उन्होंने कहा, शासन में सुधार हमारा स्वाभाविक रुख होना चाहिए। शासन सुधार प्रयोगात्मक और समय और देश की जरूरतों के अनुसार होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने अप्रचलित कानूनों में कमी और अनुपालन की संख्या को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक बताया।

हमें केवल दबाव में ही नहीं बदलना चाहिए, बल्कि सक्रिय रूप से सुधार करने का प्रयास करना चाहिए। हमें उन नियमों और मानसिकता से शासित नहीं होना चाहिए, जो कि कमी के दौर में उभरे हैं, हमारे पास बहुतायत का रवैया होना चाहिए। इसी तरह, हमें चुनौतियों पर प्रतिक्रिया करने के बजाय अनुमान लगाना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पिछले आठ सालों में देश में कई बड़ी चीजें हुई हैं। इनमें से कई अभियान ऐसे हैं कि इसके मूल में व्यवहार परिवर्तन होता है। मुझमें रजनीति का नहीं बल्कि जननीति का स्वभाव है।

पहले मुख्यमंत्री के रूप में और बाद में प्रधान मंत्री के रूप में पिछले 20-22 वर्षों के सिविल सेवकों के साथ अपनी बातचीत को याद करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक पारस्परिक रूप से सीखने का अनुभव रहा है।

मोदी ने इस वर्ष के उत्सव के महत्व को रेखांकित किया, क्योंकि यह आजादी का अमृत महोत्सव के वर्ष में हो रहा है।

उन्होंने प्रशासकों से इस विशेष वर्ष में पिछले जिला प्रशासकों को बुलाने के लिए कहा, क्योंकि इससे जिले में नई ऊर्जा का संचार होगा और अतीत के अनुभव से अवगत जिला प्रशासन के परिप्रेक्ष्य में एक स्वागत योग्य गतिशीलता प्रदान करेगा।

–आईएएनएस

एचके/एएनएम


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