अघोरियों के बारे में ये रहस्यमयी बातें जानकर उड़ जाएंगे आपके होश

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लाइव हिंदी खबर :- अघोरियों को इस पृथ्वी पर भगवान शिव का जीवित रूप माना जाता है। शिवजी के पांच रूपों में से एक रूप ‘अघोर रूप’ है। अघोरी हमेशा से लोगों की जिज्ञासा का विषय रहे हैं। अघोरियों का जीवन जितना कठिन है, उतना ही रहस्यमयी भी। ऐसे में हम आपको अघोरियों के बातें में कुछ दिलचस्प बातें बता रहे हैं।

सतरंगी दुनिया: अक्तूबर 2016

रहस्यमयी है अघोरियों की साधना विधि

अघोरियों की साधना विधि सबसे ज्यादा रहस्यमयी है। अघोरी सड़ते जीव के मांस को भी उतना ही स्वाद लेकर खाते हैं, जितना स्वादिष्ट पकवानों को स्वाद लेकर खाया जाता है। अघोरी तीन तरह की साधनाएं करते हैं। शिव साधना, शव साधना और श्मशान साधना।

मुर्दे को मांस—मदिरा चढ़ाकर साधना करते हैं अघोरी

Culture- Aghori Sadhu, Uttar Pradesh (India). | Culture- Aghori Sadhu, Uttar Pradesh (India). | anilsharmafotography.com

बताया जाता है कि शिव साधना में शव के ऊपर पैर रखकर खड़े रहकर साधना की जाती है। बाकी तरीके शव साधना की ही तरह होते हैं। इस साधना का मूल शिव की छाती पर पार्वती द्वारा रखा हुआ पैर है। ऐसी साधनाओं में मुर्दे को प्रसाद के रूप में मांस और मदिरा चढ़ाई जाती है।

श्मशाम साधना भी करते हैं अघोरी

अघोरियों के बारे में ये बातें जानकार उड़ जाएंगे आपके होश | Flickr
शव और शिव साधना के अलावा तीसरी साधना श्मशान साधना होती है। इसमें आम परिवारजनों को भी शामिल किया जा सकता है। इस साधना में मुर्दे की जगह जिस स्थान पर शवों का दाह संस्कार किया जाता है उसकी पूजा की जाती है। उस पर गंगा जल चढ़ाया जाता है। यहां प्रसाद के रूप में भी मांस-मदिरा की जगह मावा चढ़ाया जाता है।

शवों को ढूंढकर तंत्र सिद्धि के लिए करते हैं प्रयोग

जो लोग शव को जलाते नहीं उसे दफनाया या गंगा में प्रवाहित कर कर दिया जाता है। पानी में प्रवाहित ये शव डूबने के बाद हल्के होकर पानी में तैरने लगते हैं। अक्सर अघोरी तांत्रिक इन्हीं शवों को पानी से ढूंढ़कर निकालते और अपनी तंत्र सिद्धि के लिए प्रयोग करते हैं।

मुर्दे से कर सकते हैं बात

एेसा कहा जाता है कि अघोरियों की साधना में इतना दम होता है कि वो मुर्दे से भी बात कर सकते हैं। ये बातें सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन इन्हें पूरी तरह नकारा भी नहीं जा सकता। उनकी साधना को कोई चुनौती नहीं दी जा सकती। अघोरी गाय का मांस छोड़कर मानव मल से लेकर मुर्दे का मांस तक खाते हैं। अघोरपंथ में श्मशान साधना का विशेष महत्व है। इसलिए वे श्मशान में रहना ही ज्यादा पंसद करते हैं। श्मशान में साधना करना शीघ्र ही फलदायक होता है। वे अधिकांश समय दिन में सोने और रात को श्मशान में साधना करने वाले होते हैं। वे आम लोगों से कोई संपर्क नहीं रखते।

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