कैबिनेट सचिव ने बंगाल की खाड़ी में आने वाले चक्रवात को लेकर तैयारियों की समीक्षा की


नई दिल्ली, 1 दिसंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने बुधवार को राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (एनसीएमसी) की बैठक में बंगाल की खाड़ी में आने वाले चक्रवात से उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए केंद्रीय मंत्रालयों, एजेंसियों और राज्य सरकारों की तैयारियों की समीक्षा की।

गौबा ने जोर देकर कहा कि चक्रवाती तूफान के आने से पहले केंद्र और राज्यों की संबंधित एजेंसियों द्वारा सभी निवारक और एहतियाती उपाय किए जाने चाहिए, ताकि किसी भी तरह की जान-माल की हानि से बचा जा सके और संपत्ति, बुनियादी ढांचे और फसलों को नुकसान कम से कम किया जा सके।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रयास करने चाहिए कि मछुआरों और समुद्र में सभी जहाजों को तुरंत वापस बुलाया जाए और चक्रवाती तूफान से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में लोगों को जल्द से जल्द निकाला जाए, जबकि राज्यों को आश्वासन दिया गया कि सभी केंद्रीय एजेंसियां तैयार हैं और सहायता के लिए उपलब्ध रहेंगे।

समीक्षा बैठक के दौरान भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक ने समिति को बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के क्षेत्र की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी दी। चक्रवाती तूफान 3 दिसंबर तक तेज होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि चक्रवात के 4 दिसंबर की सुबह तक आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटों को पार करने की उम्मीद है, इन राज्यों के तटीय जिलों में भारी वर्षा और ज्वार की लहरों के साथ 90 किमी प्रति घंटे से 100 किमी प्रति घंटे की गति से हवा चलेगी।

इसके आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम, विशाखापत्तनम और विजयनगरम जिलों और ओडिशा के तटीय जिलों के प्रभावित होने की संभावना है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल के तटीय क्षेत्रों और गंगा के हिस्सों में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की भी संभावना है।

आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और अंडमान और निकोबार के मुख्य सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों ने समिति को चक्रवाती तूफान के संभावित रास्ते में आबादी की सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रारंभिक उपायों और यह सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे उपायों से अवगत कराया कि तूफान के बाद बुनियादी ढांचे को कम नुकसान हो।

समिति को बताया गया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने इन राज्यों में 32 टीमों को तैनात किया है और अतिरिक्त टीमों को भी तैयार रखा जा रहा है। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि जरूरत पड़ने पर सेना और नौसेना के बचाव व राहत दल जहाजों और विमानों के साथ तैनाती के लिए तैयार हैं।

–आईएएनएस

एसजीके/एएनएम

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