भोपाल गैस हादसे के गुनहगारों को जेल न भेज पाने का पीड़ितों को मलाल


भोपाल, 1 दिसम्बर (आईएएनएस)। भोपाल में हुई दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी के पीड़ितों को इस बात का मलाल है कि इस हादसे के गुनहगारों को एक मिनिट के लिए भी सलाखों के पीछे नहीं भेजा जा सका है।

भोपाल में दो-तीन दिसंबर 1984 की रात को यूनियन कार्बाइड कारखाने से रिसी मिथाइल आईसो साइनाइड (मिक) गैस ने हजारों लोगों को मौत की नींद सुला दिया था। अब भी इस गैस का दंश पीड़ितों की तीसरी पीढ़ी भुगत रही है। पीड़ितों के हक की लड़ाई लड़ने वाले संगठन सरकार के रवैए से खफा हैं।

गैस हादसे की 37वीं बरसी करीब है और पीड़ितों के जख्म हरे हैं। भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष और गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार विजेता, रशीदा बी का कहना है कि हम चाहते हैं कि दुनिया को पता चले कि विश्व के सबसे भीषण औद्योगिक हादसे के 37 साल बाद भी भोपाल गैस पीड़ितों को न्याय से वंचित रखा गया है।

उन्होंने आगे कहा, हमें यह बताते हुए खेद हो रहा है कि किसी भोपाली को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला है और आज तक कोई भी अपराधी एक मिनट के लिए भी जेल नहीं गया है, इसका कारण यह है कि हमारी लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकारें और अमरीकी कंपनियों के बीच सांठगांठ आज भी जारी है।

इसी तरह भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा की शहजादी बी कहती हैं, अस्पतालों में भीड़, संभावित हानिकारक दवाओं का बेहिसाब और अंधांधुंध इस्तेमाल और मरीजों की लाचारी वैसी ही बनी हुई है जैसी हादसे की सुबह थी। आज तक यूनियन कार्बाइड की गैसों के कारण फेफड़े, हृदय, गुर्दे, तंत्रिका तंत्र और अन्य पुरानी बीमारियों के इलाज की कोई प्रमाणिक विधि विकसित नहीं हो पाई है, क्योंकि सरकार ने हादसे के स्वास्थ्य पर हुए प्रभाव के सभी शोध बंद कर दिए हैं।

बच्चों नाम के संगठन की नौशीन खान भी सरकारों के रवैए पर सवाल उठाती हैं। उनका कहना है कि हादसे के बाद सरकारों ने निराश किया है।

–आईएएनएस

एसएनपी/एएनएम

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