उच्च राजकोषीय खर्च, खपत में सुधार ने दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी को 8 प्रतिशत के पार पहुंचाया (लीड-2)


नई दिल्ली, 30 नवंबर (आईएएनएस)। उच्च केंद्रीय वित्तीय खर्च के साथ-साथ खपत में सुधार और बेहतर मानसून के मौसम ने दूसरी तिमाही में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर को साल-दर-साल आधार पर 8.4 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है।

इसके अलावा, रुकी हुई मांग, उच्च निर्यात के साथ-साथ सेवा गतिविधियों में वृद्धि के साथ-साथ गतिशीलता में और सुधार के कारण अपट्रेंड को समर्थन मिला है।

त्वरित टीकाकरण अभियान ने भी इस साल-दर-साल वृद्धि में एक भूमिका निभाई है, क्योंकि इसने उपभोक्ता भावनाओं को उज्‍जवल किया है।

केंद्र सरकार ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2021-22 में दूसरी तिमाही के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों को जारी किया।

जुलाई-सितंबर तिमाही में देश की जीडीपी में सुधार एक अच्छा संकेत कहा जा सकता है। हालांकि विशेषज्ञों की मानें तो एक साल पहले की रिकॉर्ड गिरावट की वजह से कम आधार इसकी प्रमुख वजह रही है। इसके साथ मैन्युफैक्च रिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में भी रिकवरी हुई है और मानसून सीजन भी बेहतर रहा है, जिसका इस पर सकारात्मक असर पड़ा है।

पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के दौरान भारत की जीडीपी विकास दर में 7.4 प्रतिशत की गिरावट आई थी।

क्रमिक आधार पर, वित्त वर्ष 2022 की दूसरी तिमाही के दौरान सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में 20.1 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

2021-22 में जीडीपी ऐट कॉन्स्टैंट प्राइसेज 35.73 लाख करोड़ रुपये रहा है। इससे पहले 2020-21 की दूसरी तिमाही में यह आंकड़ा 32.97 करोड़ रुपये पर रहा था।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने अपने वित्त वर्ष 2022 की दूसरी तिमाही के जीडीपी अनुमान में यह जानकारी दी है। बयान के अनुसार, देश की जीडीपी दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर) में 8.4 प्रतिशत दर्ज की गई है।

बता दें कि अधिकतर विशेषज्ञों और व्यावसायिक जगत से जुड़ी एजेंसियों ने दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.5 प्रतिशत और 8.5 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान जताया था।

बयान के अनुसार, 2021-22 की दूसरी तिमाही में मूल कीमतों पर तिमाही जीवीए 32.89 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जबकि 2020-21 की दूसरी तिमाही में यह 30.32 लाख करोड़ रुपये था, जो कि 8.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

जीवीए में कर शामिल हैं, लेकिन इसमें सब्सिडी शामिल नहीं है।

अर्थशास्त्रियों के एक सर्वेक्षण में, आईएएनएस ने 29 नवंबर को भविष्यवाणी की थी कि खपत में सुधार के आधार पर, भारत की जीडीपी वित्त वर्ष 2022 की दूसरी तिमाही में 7 से 9 प्रतिशत के बीच बढ़ने की उम्मीद है।

वर्ष-दर-वर्ष आधार पर, लोक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाओं पर व्यय में तेज वृद्धि हुई, जिसमें पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में (-) 9.2 प्रतिशत से 17.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

2021-22 के लिए दूसरी तिमाही की जीवीए के साथ कृषि, वानिकी और मछली पकड़ने के क्षेत्र में 4.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि 2020-21 की इसी तिमाही में 3 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में 4.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

इसी तरह, विनिर्माण क्षेत्र से वित्त वर्ष 2022 की दूसरी तिमाही में जीवीए 5.5 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में (-) 1.5 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में 49.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

खनन और उत्खनन क्षेत्र में पिछले वित्त वर्ष के संकुचन (-) 6.5 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में 18.6 प्रतिशत के मुकाबले 15.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

–आईएएनएस

एकेके/एएनएम

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