हो जाएं सावधान अगर 30 की उम्र पार कर ली है तो बरते सावधानी

Advertisements

लाइव हिंदी खबर (हेल्थ कार्नर ) :-  जैसे ही महिलाएं 30 की उम्र पार करती हैं वैसे ही उन्हें अपने डाइट और फिटनेस रूटीन में बदलाव करने शुरू कर देना चाहिए। ये बदलाव बाद में असर दिखाते हैं। जब हम जवान होते हैं तब तक हमारी बॉडी हमें माफ करती है लेकिन 30 पार करते ही बॉडी की चाल धीमी पडऩे लगती है। आप इस उम्र में आसानी से कई बीमारियों की शिकार भी हो सकती हैं, कुछ गंभीर मामलों में मां बनने के सुख से भी वंचित रह सकती हैं। समस्याएं जो कि 30 पार होने पर कर सकती हैं परेशान-

स्वास्थ्य Archives - Page 520 of 833 - LIVE HINDI KHABARफाइब्राइड्रस की समस्या
आजकल फाइबाइड्र महिलाओं की सबसे आम समस्या बन गई है। फाइबाइड के चलते महिलाओं में कई समस्या भी शुरू हो जाती है। यह आम तौर पर 30 से 50 साल उम्र की महिलाओं में विकसित होता है। और कभी कभी ये पीढी दर पीढी हो सकता है। फाइब्राइड्र से ग्रस्त कई महिलाओं को अपने फाइब्राइड्र के बारे में पता नहीं होता है जबकि कुछ फाइब्राइड्र को चिकित्सक के द्वारा अंदरूनी परीक्षण से भी महसूस किया ता सकता है। इसकी पुष्टि अल्ट्रासाउड या अन्य जांचों से की जा सकती है।

प्रजनन अक्षमता
महिलाओं में 30 की उम्र के आसपास प्रजनन क्षमता कम होने लगती है। 35 साल की उम्र के बाद तो यह और अधिक तेजी से घटने लगती है। जैसे-जैसे महिला की उम्र बढ़ती जाती है, उसके गर्भवती होने की संभावना घटती जाती है और प्रजनन अक्षमता (इनफर्टिलिटी) उत्पन्न होने की संभावना बढ़ती जाती है। 35 साल की उम्र के बाद प्रजनन अक्षमता, गर्भपात या शिशु में समस्याओं का सामना करने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ती जाती है।

मधुमेह
मधुमेह से पीडित महिलाओं में फैलोपियन ट्यूब के विकारग्रस्त होने और यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) से ग्रस्त होने की आशंकाएं काफी बढ़ जाती हैं। फैलोपियन ट्यूब का विकारग्रस्त होना देश की महिलाओं में बांझपन (इनफर्टिलिटी) का एक प्रमुख कारण है। मधुमेह के कारण गर्भस्थ महिला के भ्रूण पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। यह समस्या 30 की उम्र पार करने के बाद गंभीर रूप ले सकती है।

आपकी उम्र और प्रजनन क्षमता - BabyCenter Indiaपीसीओएस
महिलाओं में बांझपन की समस्या का एक मुख्य कारण पोलीसिस्टिक ओविरियन सिन्ड्रोम-पीसीओएस है। इसकी वजह से बनने वाले सिस्ट का समय रहते इलाज न किया जाए तो यह एक कैंसर का रूप ले सकता है। करीब दस फीसदी महिलाएं किशोरावस्था में ही पीसीओएस की समस्या से प्रभावित होती है।

पीओएफ यानी प्रीमेच्योर ओवरीज फेल
भारत में 30 से 40 साल की उम्र वर्ग में पीएफओ के मामले 0.1 प्रतिशत हैं। वैसे तो ये आंकड़े देखने में नाममात्र हैं लेकिन 25 प्रतिशत महिलाएं अनियमित माहवारी या माहवारी के कई महीने तक न होने के बाद फिर से शुरू होने (अमनोरिया) जैसी समस्याओं से जूझ रही हैं। पीओएफ का मतलब है 40 की उम्र से पहले ओवरीज का सामान्य काम न करना। मतलब कि ओवरीज में नियमित रूप से अंडे का रिलीज न होना। इससे बांझपन आम समस्या होती है। (आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. शोभा गुप्ता से बातचीत पर आधारित)

 

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published.