गीतकार महबूब: फिल्मी और रॉक गानों के बीच धुंधली रही रेखा

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मुंबई, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। फिल्मी जगत में 25 से अधिक वर्ष बिताने वाले अनुभवी गीतकार महबूब का मानना है कि फिल्मी और रॉक गीत के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है।

महबूब ने आईएएनएस को बताया कि वर्तमान समय में लोगों का रूझान फिल्मी गीतों में कम होने के पीछे एक कारण अच्छे गीतों की कमी हो सकता है। हां बिल्कुल! नब्बे के दशक में, गीत लोगों को आकर्षित करते थे। मेरा मुख्य रूप से मानना है कि यह अच्छी मेलोडी, अच्छा गीत, अच्छे विचार और कविता का एक अलग मिश्रण होते थे। मुझे लगता है कि आजकल की रफ्तार भरी भागती दुनिया में फिल्म संगीत और रॉक संगीत के बीच की रेखाएं धुंधली हो गई है।

महबूब ने समझाया, इसके पीछे यह तर्क है कि गाना कौन सा लेना है इसे निर्माता चुनता है जबकि गीतकार और संगीत निर्देशक सिर्फनिर्देशक द्वारा बताई गई बातों पर अमल करते हैं फिर निर्माता दर्शकों को दोषी मानते हैं कि उन्हें वही दिया गया जो वे चाहते थे जबकि दर्शक निर्माता और निर्देशक को दोषी मानते हैं क्योंकि उन्हें वो नहीं दिया गया जो वे चाहते थे। मूल रूप से यह एक चिकन और अंडे की स्थिति है जहां किसी को भी दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।

59 वर्षीय गीतकार ने 1990 और 2000 के दशक की शुरूआत में बॉम्बे, रंगीला और युवा सहित कुछ सर्वश्रेष्ठ फिल्मों की संगीत एल्बमों के लिए गीत लिखे हैं।

उन्होंने कहा बॉलीवुड में मेरी यात्रा बिल्कुल फिल्मी रही है, जो उतार-चढ़ाव से भरी रही और उसी के इर्द-गिर्द गोल-गोल घूमती रही। खुद को इस मुकाम तक लाने के लिए मैंने 12 साल तक संघर्ष किया है। फिर उसके बाद मेरे स्वास्थ्य में बड़ी गिरावट आई और अब मैं यहां हूं।

25 साल में इस इंडस्ट्री में बहुत से बदलाव आए हैं जब से उन्होंने काम करना शुरू किया है तब से सोशलाइजिंग कम हो गई है और म्यूजिकल सिटिंग का कॉन्सेप्ट गायब हो गया है।

इस बार महबूब एक बार फिर आगामी फिल्म हीरोपंती 2 के लिए संगीतकार एआर रहमान के साथ सहयोग कर रहे हैं।

–आईएएनएस

एएनएम