सैन्य आधुनिकीकरण पर 130 अरब डॉलर खर्च करने की योजना : राजनाथ

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बेंगलुरु, 3 फरवरी (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि भारत ने अगले 7-8 वर्षों में सैन्य आधुनिकीकरण पर 130 अरब डॉलर खर्च करने की योजना बनाई है।

यहां एयरो इंडिया शो में बोलते हुए, मंत्री ने कहा, हमने हाल ही में अपने सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। बड़े और जटिल रक्षा प्लेटफार्मों का घरेलू विनिर्माण अब हमारी नीति के तहत आत्मानिर्भर भारत अभियान के तहत केंद्रित हो गया है। सैन्य आधुनिकीकरण पर 130 अरब डॉलर खर्च करने की हमारी योजना है।

उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता और निर्यात के दोहरे लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए 2024 तक एयरोस्पेस और रक्षा उपकरणों और सेवाओं में 35,000 करोड़ रुपये के निर्यात सहित 1,75,000 करोड़ रुपये का कारोबार हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उन्होंने कहा कि भारत कई मित्र देशों को रक्षा उपकरणों का एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता बनने की क्षमता रखता है। मंत्री ने कहा, हमारे पास एक मजबूत और विविधतापूर्ण सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम क्षेत्र है, जिसकी 5,000 से अधिक सक्रिय इकाइयां हैं।

एयरो इंडिया के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत आज रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण में एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा, कि यह अवसर एक बढ़ती मांग, बेहतर नवाचार, अनुकूल नीतियों और रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण क्षेत्र में परिपक्व पारिस्थितिकी तंत्र के संगम के रूप में आता है।

मंत्री ने कहा कि विमानन क्षेत्र में, एयर शो और विमानन प्रदर्शनी सबसे चमकीले गैलेक्सी में से एक है जो विभिन्न प्रकार के विकल्प, समाधान, साझेदारी और अवसर प्रदान करते हैं।

सिंह ने मालदीव, यूक्रेन, गिनी, ईरान, कोमोरोस और मेडागास्कर के रक्षा मंत्रियों का आभार व्यक्त किया, जो इस अवसर पर उपस्थित थे, और अन्य वर्चुअल रूप से शामिल हुए।

80 से अधिक विदेशी कंपनियों, रक्षा मंत्रियों और प्रतिनिधियों, सेवा प्रमुखों और 55 से अधिक देशों के अधिकारियों सहित लगभग 540 प्रदर्शक इस आयोजन में भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा, यह वैश्विक समुदाय के बढ़ते आशावाद को दर्शाता है।

सिंह ने यह भी कहा कि एयरोस्पेस और इंजीनियरिंग फर्मों द्वारा विकसित मौजूदा आपूर्ति श्रृंखला, एक निवेशक-हितैषी सरकार, सरलीकृत प्रक्रियाओं और सिंगल-विंडो तंत्र के माध्यम से फास्ट-ट्रैक व्यापार की मंजूरी के साथ कर्नाटक को उद्योग के लिए एक बहुत ही आकर्षक गंतव्य बनाती है।

–आईएएनएस

वीएवी-एसकेपी


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