ऋषि कपूर के बारे में कुछ अनसुनी बाते जो आपको कर देंगी हैरान जिसे पढ़ कर हो जायेंगे दंग

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अपनी फिल्म प्रेम रोग की शूटिंग के दौरान जब ऋषि कपूर हॉलैंड गए थे उस वक्त नीतू कपूर और उनकी मां भी उनके साथ थे फिल्म कास्ट आफ ज्यादा बड़ा नहीं था इसलिए नीतू खुद चाय बनाती और सबको पिला दी थी शूटिंग के दौरान ऋषि कपूर और पद्मिनी कोल्हापुरे को सफेद कपड़े पहने थे इसलिए नीतू कपूर खुद पद्मिनी कोल्हापुरे की सफेद साड़ी और ऋषि कपूर की सफेद शर्ट शूटिंग के बाद रोज शाम को धोती थी यह तरह का त्याग था नीतू कपूर का ऋषि के लिए वह अपने जमाने की नाम ही स्टार थी और शादी के बाद सब कुछ छोड़ दिया और पति की सेवा में लग गई यह बहुत बड़ा निर्णय था जिसको लेने में नीतू की मां ने थी उसकी मदद की

जहा 21 की उम्र में सभी लोगो का करियर शुरू होता है वही नीतू ने कैरियर २१ की उम्र में ख़तम कर लिया वो भी खुशी खुशी शादी के कुछ दिनों बाद ही ऋषि कपूर ने अपनी ससुराल में रहना शुरू कर दिया था जो कि पाली हिल में था उनके चेंबूर वाले घर में कुछ मरम्मत का काम चल रहा था उस जमाने में लोग दो सितारों का काफी मजाक बनाया करते थे एक ऋषि कपूर जो अपनी ससुराल में पालीगंज में रहते थे और दूसरे ही पाली हिल में रहने वाले सितारे थे दिलीप कुमार जो सायरा बानो की मम्मी के घर में रहते थे अंदर में कहा जाता था कि बॉलीवुड में दो बड़े सितारे हैं जो पाली हिल में तो रहते हैं पर घर जमाई बनकर ऋषि कपूर अपनी ससुराल में करीब 10 साल तक रहे। जब रणबीर कपूर का जन्म हुआ उस वक्त भी ऋषि कपूर अपनी ससुराल में ही रह रहे थे उसके कुछ सालों बाद ऋषि कपूर ने अपनी ससुराल के पास ही पाली हिल के इलाके में एक प्लॉट खरीदा और उसमें अपना बंगला बनाया नाम रखा कृष्णा राज अपनी मम्मी के नाम पर रखा

साल 2010 में आई फिल्म दो दूनी चार में ऋषि कपूर के साथ जूही चावला को लिया जाना था लेकिन जूही चावला एक मां का किरदार निभाने के लिए तैयार नहीं थी इसलिए ऋषि कपूर ने खुद नीतू को रिक्वेस्ट किया उनके साथ काम करें नीतू ने पहले तो इंकार कर दिया ऋषि कपूर ने उन्हें किसी तरह अपनी फिल्म के डायरेक्टर हबीब फैजल से मिलने के लिए तैयार कर लिया दोनों सिर्फ 20 मिनट के लिए मिलने गए थे और 1 घंटे के बाद बाहर निकले तब तक नीतू फिल्म की पूरी कहानी सुन चुकी थी और मन ही मन यह फैसला कर चुकी थी कि वह ये फिल्म जरूर करेंगी लेकिन यह सफर भी आसान नहीं रहा क्योंकि नीतू लगातार अपनी डायलॉग्स बोलती नहीं यहां तक कि पहले दिन की शूटिंग बड़ी मुश्किल से पूरी हुई

असल में नीतू पूरी तरह से भूल चुकी थी डायलॉग कैसे याद रखे जाते हैं क्योंकि वह कई सालों के बाद किसी फिल्म के सेट पर काम करने वापस आईं थीं एक और आदत उनको लग चुकी थी और वो थी चश्मा पहनने की उन्हें बिना चश्मा पहने कुछ भी समझ नहीं आता था ऋषि कपूर ने उनको नए सिरे से ट्रेनिंग दी और सिखाया कि काम कैसे करना हैअपना फिल्मी करियर छोड़ने के बाद नीतू ने सिर्फ तीन ही फिल्में की दो दूनी चार 2010 में और जब तक है जान 2012 में और यह दोनों ही फिल्में ऋषि कपूर के साथ की इसके बाद वह फिल्म बेशरम में काम करने को तैयार हुई साल 2013 में क्योंकि इसमें उन्हें अपने बेटे रणबीर और पति ऋषि दोनों के साथ काम करने का मौका मिला था

लेखक :-  उज्जवल त्रिवेदी

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