दूसरी कोविड लहर से आर्थिक झटके कम गंभीर होंगे

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हालांकि, रिकवरी की गति, (1) टीकों तक पहुंच और डिलीवरी, और (2) निजी खपत में रिकवरी की ताकत द्वारा निर्धारित की जाएगी, जो निम्न और मध्यम आय वाले परिवारों की नौकरी, आय और धन हानि की बैलेंस शीट के बिगड़ने से बाधित हो सकती है।

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रिपोर्ट के अनुसार कोविड-19 की दूसरी लहर और उसके बाद का लॉकडाउन तब लगाया गया, जब भारत आर्थिक सुधार और दोहरे अंकों की वृद्धि की ओर एक स्थिर रास्ते पर था। वायरस का पुनरुत्थान 2021 के लिए भारत के विकास पूवार्नुमान में अनिश्चितता जोड़ता है। हालांकि, यह संभावना है कि आर्थिक क्षति अप्रैल से जून तिमाही तक ही सीमित रहेगी। वर्तमान में हम उम्मीद करते हैं कि भारत की वास्तविक जीडीपी 2021 में 9.6 प्रतिशत और 2022 में 7.0 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरी लहर कुल मांग के लिए एक झटका थी। हम उम्मीद करते हैं कि मौजूदा लॉकडाउन का अप्रैल 2020 में देशव्यापी लॉकडाउन की तुलना में आर्थिक गतिविधियों पर प्रभाव कम होगा, क्योंकि नवीनतम प्रतिबंध अधिक लक्षित, स्थानीयकृत और कम कड़े थे।

दूसरी लहर ने मुख्य रूप से कुल मांग को प्रभावित किया है।

आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में सख्त लॉकडाउन अप्रैल से जून की आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करेगा। दूसरी लहर की चपेट में आने वाले 10 राज्य सामूहिक रूप से भारत के सकल घरेलू उत्पाद के पूर्व, महामारी स्तर के 60 प्रतिशत से अधिक के लिए जिम्मेदार हैं। चार राज्यों में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक ने वित्तीय वर्ष 2019 से 20 में सभी राज्यों में सबसे बड़े शेयरों में योगदान दिया है।

साथ ही मौजूदा तिमाही में आर्थिक नुकसान को सीमित करने के लिए तेजी से टीकाकरण की प्रगति सर्वोपरि होगी। जून में तीसरे सप्ताह तक, केवल 16 प्रतिशत आबादी को एक टीका खुराक प्राप्त हुई थी। उनमें से केवल 3.6 प्रतिशत को ही पूरी तरह से टीका लगाया गया है। टीकाकरण की गति बढ़ने के साथ वर्ष की दूसरी छमाही में गतिशीलता और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। सरकार ने हाल ही में टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए वैक्सीन खरीद को केंद्रीकृत करने की रणनीति की घोषणा की, जो सफल होने पर आर्थिक सुधार का समर्थन करेगी।

–आईएएनएस

एमएसबी/एएनएम

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