सबसे ज्यादा वैक्सीन लेने के इच्छुक सवर्ण हिंदू, ओबीसी : आईएएनएस सी वोटर कोविड ट्रैकर

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आईएएनएस सी वोटर कोविड ट्रैकर में सामने आए आंकड़ों यह इस बात का पता चला है।

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ट्रैकर के अनुसार, 54.6 प्रतिशत मुसलमानों ने कहा कि टीके उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुकूल हैं और उनके बीच वैक्सीन को लेकर कुल सहमति संख्या 24.2 प्रतिशत दर्ज की गई।

अनुसूचित जनजातियों की बात करें तो इस समुदाय के बीच शुद्ध सहमत संख्या 24.6 प्रतिशत है, क्योंकि 55.5 प्रतिशत सहमत हैं, जबकि 30.8 प्रतिशत असहमत हैं कि टीके उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुकूल हैं।

ईसाइयों के लिए कुल सहमत संख्या 38.8 प्रतिशत पर सबसे अधिक देखी गई है, क्योंकि 65.4 प्रतिशत लोग इसे लेकर सहमत दिखाई दिए हैं, जबकि 26.6 प्रतिशत असहमत हैं। इसके बाद 38.6 प्रतिशत के साथ कुल सहमति के मामले में उच्च जाति के हिंदुओं का नंबर आता है। इनमें 63.9 प्रतिशत सहमत और 25.3 प्रतिशत लोग असहमत हैं।

अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए नेट सहमत संख्या 37.6 प्रतिशत है, जबकि सिखों के लिए यह 30.5 प्रतिशत और अनुसूचित जाति के लिए 30.3 प्रतिशत संख्या दर्ज की गई है।

सर्वे में सामने आया कि उच्च जाति के हिंदू वैक्सीन लेने के लिए सबसे ज्यादा उत्सुक हैं, जबकि सिख सामाजिक समूहों के बीच वैक्सीन लेने के लिए सबसे कम उत्सुक हैं।

ट्रैकर में एक प्रश्न पूछा गया कि अगर वैक्सीन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होती है तो क्या वह टीका लेंगे, तो केवल 11.9 प्रतिशत ने हां के साथ जवाब दिया। जबकि 54.8 सहमत रहे और 42.9 प्रतिशत ने सहमति नहीं जताई।

उच्च जाति के हिंदुओं के लिए शुद्ध सहमत संख्या 73.6 प्रतिशत पर सबसे अधिक दर्ज की गई है। इसके बाद अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए यह 70.3 प्रतिशत, अनुसूचित जाति के लिए 63.2 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिए 61.2 प्रतिशत, मुसलमानों के लिए 40 प्रतिशत और ईसाई के लिए 38.2 प्रतिशत दर्ज की गई है।

पिछले छह महीनों के दौरान जनसंख्या के अनुपात में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करते हुए अखिल भारतीय नमूना आकार 43032 रहा है। त्रुटि का मार्जिन मैक्रो स्तर पर प्लस-माइनस तीन प्रतिशत और सूक्ष्म स्तर पर पांच प्रतिशत है।

सी वोटर के संस्थापक-निदेशक यशवंत देशमुख ने कहा, वास्तव में भारत दुनिया के सबसे अधिक वैक्सीन समर्थक देशों में से एक है। मैं यह भी नहीं जानता कि कुछ एजेंसियों द्वारा आखिर ऐसी व्यक्तिपरक कहानियां क्यों पेश की जाती हैं, जो भारत को सपेरों के देश होने के अजीब आख्यान के अनुरूप होती हैं। हमारे कोविड ट्रैकर में, हमने जाति और धर्म की रेखाओं पर भी क्रॉस टैब किया है और हां., भारत में जनजातीय आबादी और मुसलमानों की तुलना में उच्च जाति और ओबीसी टीकाकरण के लिए अधिक सहज हैं। लेकिन यहां तक कि वे टीकाकरण अभियान पर नेट पॉजिटिव हैं। कुल मिलाकर भारत में 80 प्रतिशत से अधिक प्रो-वैक्सीन (टीकों को लेकर सकारात्मक) हैं। यह टीकों पर अमेरिकी जनता की भावना से लगभग 10 प्रतिशत अधिक सकारात्मक दर है।

–आईएएनएस

एकेके/एएनएम

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